ब्राह्मणोऽग्निश्च वै विष्णोः सर्वदेवात्मनो मुखम्॥ ९
yatpūjayā kāmadughānyāti lokāngṛhānvitaḥ|
brāhmaṇo'gniśca vai viṣṇoḥ sarvadevātmano mukham|| 9
अर्थ
सर्वदेवमय भगवान्के मुख हैं—ब्राह्मण और अग्नि। गृहस्थ पुरुष यदि इन दोनोंकी पूजा करता है तो उसे उन लोकोंकी प्राप्ति होती है, जो समस्त कामनाओंको पूर्ण करनेवाले हैं॥ ९॥
यत्पूजया कामदुघान्याति लोकान्गृहान्वितः।
ब्राह्मणोऽग्निश्च वै विष्णोः सर्वदेवात्मनो मुखम्॥ ९
सर्वदेवमय भगवान्के मुख हैं—ब्राह्मण और अग्नि। गृहस्थ पुरुष यदि इन दोनोंकी पूजा करता है तो उसे उन लोकोंकी प्राप्ति होती है, जो समस्त कामनाओंको पूर्ण करनेवाले हैं॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 979) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/16/9/