॥ श्रीहरिः ॥
प्रतिपद्दिनमारभ्य यावच्छुक्लत्रयोदशी।
ब्रह्मचर्यमधःस्वप्नं स्नानं त्रिषवणं चरेत्॥ ४८
pratipaddinamārabhya yāvacchuklatrayodaśī|
brahmacaryamadhaḥsvapnaṃ snānaṃ triṣavaṇaṃ caret|| 48
अर्थ
फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदासे लेकर त्रयोदशीपर्यन्त ब्रह्मचर्यसे रहे, पृथ्वीपर शयन करे और तीनों समय स्नान करे॥ ४८॥
प्रतिपद्दिनमारभ्य यावच्छुक्लत्रयोदशी।
ब्रह्मचर्यमधःस्वप्नं स्नानं त्रिषवणं चरेत्॥ ४८
फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदासे लेकर त्रयोदशीपर्यन्त ब्रह्मचर्यसे रहे, पृथ्वीपर शयन करे और तीनों समय स्नान करे॥ ४८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.48 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 983) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/16/48/