उस नैवेद्यको भगवान्के भक्तोंमें बाँट दे या स्वयं पा ले। आचमन और पूजाके बाद ताम्बूल निवेदन करे॥ ४१॥✎ 754755
निवेदितं तद् भक्ताय दद्याद् भुञ्जीत वा स्वयम्।
दत्त्वाऽऽचमनमर्चित्वा ताम्बूलं च निवेदयेत्॥ ४१
उस नैवेद्यको भगवान्के भक्तोंमें बाँट दे या स्वयं पा ले। आचमन और पूजाके बाद ताम्बूल निवेदन करे॥ ४१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.41 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 982) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/16/41/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)