श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.32

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

नमः शिवाय रुद्राय नमः शक्तिधराय च।

सर्वविद्याधिपतये भूतानां पतये नमः॥ ३२

namaḥ śivāya rudrāya namaḥ śaktidharāya ca|

sarvavidyādhipataye bhūtānāṃ pataye namaḥ|| 32

अर्थ

आप ही लोककल्याणकारी शिव और आप ही प्रलयकारी रुद्र हैं। समस्त शक्तियोंको धारण करनेवाले भी आप ही हैं। आपको मेरा बार-बार नमस्कार है। आप समस्त विद्याओंके अधिपति एवं भूतोंके स्वामी हैं। आपको मेरा नमस्कार॥ ३२॥✎ 752 753

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #752 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #753 शब्दोंके बीचका स्थान: वराहभगवान् ने → वराहभगवान्‌ने

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