कश्यपजीने कहा—देवि! जब मुझे सन्तानकी कामना हुई थी, तब मैंने भगवान् ब्रह्माजीसे यही बात पूछी थी। उन्होंने मुझे भगवान्को प्रसन्न करनेवाले जिस व्रतका उपदेश किया था, वही मैं तुम्हें बतलाता हूँ॥ २४॥✎ 751
एतन्मे भगवान्पृष्टः प्रजाकामस्य पद्मजः।
यदाह ते प्रवक्ष्यामि व्रतं केशवतोषणम्॥ २४
कश्यपजीने कहा—देवि! जब मुझे सन्तानकी कामना हुई थी, तब मैंने भगवान् ब्रह्माजीसे यही बात पूछी थी। उन्होंने मुझे भगवान्को प्रसन्न करनेवाले जिस व्रतका उपदेश किया था, वही मैं तुम्हें बतलाता हूँ॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 981) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/16/24/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)