श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.24

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

कश्यप उवाच

एतन्मे भगवान्पृष्टः प्रजाकामस्य पद्मजः।

यदाह ते प्रवक्ष्यामि व्रतं केशवतोषणम्॥ २४

etanme bhagavānpṛṣṭaḥ prajākāmasya padmajaḥ|

yadāha te pravakṣyāmi vrataṃ keśavatoṣaṇam|| 24

अर्थ

कश्यपजीने कहा—देवि! जब मुझे सन्तानकी कामना हुई थी, तब मैंने भगवान् ब्रह्माजीसे यही बात पूछी थी। उन्होंने मुझे भगवान्‌को प्रसन्‍न करनेवाले जिस व्रतका उपदेश किया था, वही मैं तुम्हें बतलाता हूँ॥ २४॥✎ 751

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #751 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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