भगवन्! जब आप-जैसे प्रजापति मुझे इस प्रकार धर्मपालनका उपदेश करते है; तब भला मेरे मनकी ऐसी कौन-सी कामना है जो पूरी न हो जाय?॥ १३॥
को नु मे भगवन्कामो न सम्पद्येत मानसः।
यस्या भवान्प्रजाध्यक्ष एवं धर्मान्प्रभाषते॥ १३
भगवन्! जब आप-जैसे प्रजापति मुझे इस प्रकार धर्मपालनका उपदेश करते है; तब भला मेरे मनकी ऐसी कौन-सी कामना है जो पूरी न हो जाय?॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 979) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/16/13/