श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.15.27

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

ब्रूहि कारणमेतस्य दुर्धर्षत्वस्य मद्रिपोः।✎ 2179

ओजः सहो बलं तेजो यत एतत्समुद्यमः॥ २७✎ 2179

brūhi kāraṇametasya durdharṣatvasya madripoḥ|

ojaḥ saho balaṃ tejo yata etatsamudyamaḥ|| 27

अर्थ

आप कृपा करके मुझे बतलाइये कि मेरे शत्रुकी इतनी बढ़तीका, जिसे किसी प्रकार भी दबाया नहीं जा सकता, क्या कारण है? इसके शरीर, मन और इन्द्रियोंमें इतना बल और इतना तेज कहाँसे आ गया है कि इसने इतनी बड़ी तैयारी करके चढ़ाई की है’॥ २७॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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