श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.13.34

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

पवित्राश्चाक्षुषा देवाः शुचिरिन्द्रो भविष्यति।

अग्‍निर्बाहुः शुचिः शुद्धो मागधाद्यास्तपस्विनः॥ ३४

pavitrāścākṣuṣā devāḥ śucirindro bhaviṣyati|

agnirbāhuḥ śuciḥ śuddho māgadhādyāstapasvinaḥ|| 34

अर्थ

उस समय पवित्र, चाक्षुष आदि देवगण होंगे और इन्द्रका नाम होगा शुचि। अग्‍नि, बाहु, शुचि, शुद्ध और मागध आदि सप्तर्षि होंगे॥ ३४॥

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