॥ श्रीहरिः ॥
देवहोत्रस्य तनय उपहर्ता दिवस्पतेः।
योगेश्वरो हरेरंशो बृहत्यां सम्भविष्यति॥ ३२
devahotrasya tanaya upahartā divaspateḥ|
yogeśvaro hareraṃśo bṛhatyāṃ sambhaviṣyati|| 32
अर्थ
देवहोत्रकी पत्नी बृहतीके गर्भसे योगेश्वरके रूपमें भगवान्का अंशावतार होगा और उसी रूपमें भगवान् दिवस्पतिको इन्द्रपद देंगे॥ ३२॥
देवहोत्रस्य तनय उपहर्ता दिवस्पतेः।
योगेश्वरो हरेरंशो बृहत्यां सम्भविष्यति॥ ३२
देवहोत्रकी पत्नी बृहतीके गर्भसे योगेश्वरके रूपमें भगवान्का अंशावतार होगा और उसी रूपमें भगवान् दिवस्पतिको इन्द्रपद देंगे॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.13.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 972) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/8/13/32/