उस मन्वन्तरमें ऋतधामा नामक इन्द्र होंगे और हरित आदि देवगण। तपोमूर्ति, तपस्वी आग्नीध्रक आदि सप्तर्षि होंगे॥ २८॥✎ 1996
ऋतधामा च तत्रेन्द्रो देवाश्च हरितादयः।
ऋषयश्च तपोमूर्तिस्तपस्व्याग्नीध्रकादयः॥ २८
उस मन्वन्तरमें ऋतधामा नामक इन्द्र होंगे और हरित आदि देवगण। तपोमूर्ति, तपस्वी आग्नीध्रक आदि सप्तर्षि होंगे॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.13.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 971) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/13/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#1996 मुद्रणकी अपनी भूल (गीताप्रेसके पुराने संस्करणों और ग्रन्थकी अपनी गणनासे): ऋतुधामा → ऋतधामा