॥ श्रीहरिः ॥
आर्यकस्य सुतस्तत्र धर्मसेतुरिति स्मृतः।
वैधृतायां हरेरंशस्त्रिलोकीं धारयिष्यति॥ २६
āryakasya sutastatra dharmaseturiti smṛtaḥ|
vaidhṛtāyāṃ hareraṃśastrilokīṃ dhārayiṣyati|| 26
अर्थ
आर्यककी पत्नी वैधृताके गर्भसे धर्मसेतुके रूपमें भगवान्का अंशावतार होगा और उसी रूपमें वे त्रिलोकीकी रक्षा करेंगे॥ २६॥
आर्यकस्य सुतस्तत्र धर्मसेतुरिति स्मृतः।
वैधृतायां हरेरंशस्त्रिलोकीं धारयिष्यति॥ २६
आर्यककी पत्नी वैधृताके गर्भसे धर्मसेतुके रूपमें भगवान्का अंशावतार होगा और उसी रूपमें वे त्रिलोकीकी रक्षा करेंगे॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.13.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 971) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/13/26/