श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.13.11

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

अष्टमेऽन्तर आयाते सावर्णिर्भविता मनुः।

नि१र्मोकविरजस्काद्याः सावर्णितनया नृप२॥ ११

aṣṭame'ntara āyāte sāvarṇirbhavitā manuḥ|

nirmokavirajaskādyāḥ sāvarṇitanayā nṛpa|| 11

अर्थ

आठवें मन्वन्तरमें सावर्णि मनु होंगे। उनके पुत्र होंगे निर्मोक, विरजस्क आदि॥ ११॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—निर्मोह०।

    (मुद्रित पृष्ठ 970)
  2. २

    प्रा० पा०—नृपाः।

    (मुद्रित पृष्ठ 970)

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें