श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! विवस्वान्के पुत्र यशस्वी श्राद्धदेव ही सातवें (वैवस्वत) मनु हैं। यह वर्तमान मन्वन्तर ही उनका कार्यकाल है। उनकी सन्तानका वर्णन मैं करता हूँ॥ १॥
मनुर्विवस्वतः पुत्रः श्राद्धदेव इति श्रुतः।
सप्तमो वर्तमानो यस्तदपत्यानि मे शृणु॥ १
श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! विवस्वान्के पुत्र यशस्वी श्राद्धदेव ही सातवें (वैवस्वत) मनु हैं। यह वर्तमान मन्वन्तर ही उनका कार्यकाल है। उनकी सन्तानका वर्णन मैं करता हूँ॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.13.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 969) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/13/1/