श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.12.6

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तवैव चरणाम्भोजं श्रेयस्कामा निराशिषः।

विसृज्योभयतः सङ्गं मुनयः समुपासते॥ ६

tavaiva caraṇāmbhojaṃ śreyaskāmā nirāśiṣaḥ|

visṛjyobhayataḥ saṅgaṃ munayaḥ samupāsate|| 6

अर्थ

कल्याणकामी महात्मालोग इस लोक और परलोक दोनोंकी आसक्ति एवं समस्त कामनाओंका परित्याग करके आपके चरणकमलोंकी ही आराधना करते हैं॥ ६॥

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