भगवान् श्रीहरिने बड़े प्रेमसे गौरी-शंकरभगवान्का स्वागत-सत्कार किया। वे भी सुखसे बैठकर भगवान्का सम्मान करके मुसकराते हुए बोले॥ ३॥
सभाजितो भगवता सादरं सोमया भवः।
सूपविष्ट उवाचेदं प्रतिपूज्य स्मयन्हरिम्॥ ३
भगवान् श्रीहरिने बड़े प्रेमसे गौरी-शंकरभगवान्का स्वागत-सत्कार किया। वे भी सुखसे बैठकर भगवान्का सम्मान करके मुसकराते हुए बोले॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.12.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 963) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/12/3/