॥ श्रीहरिः ॥
निरीक्ष्य पृतनां देवः परैरभ्यर्दितां रणे।
उदयच्छद् रिपुं हन्तुं वज्रं वज्रधरो रुषा॥ २७
nirīkṣya pṛtanāṃ devaḥ parairabhyarditāṃ raṇe|
udayacchad ripuṃ hantuṃ vajraṃ vajradharo ruṣā|| 27
अर्थ
वज्रधारी इन्द्रने देखा कि शत्रुओंने रणभूमिमें हमारी सेनाको रौंद डाला है, तब उन्होंने बड़े क्रोधसे शत्रुको मार डालनेके लिये वज्रसे आक्रमण किया॥ २७॥
निरीक्ष्य पृतनां देवः परैरभ्यर्दितां रणे।
उदयच्छद् रिपुं हन्तुं वज्रं वज्रधरो रुषा॥ २७
वज्रधारी इन्द्रने देखा कि शत्रुओंने रणभूमिमें हमारी सेनाको रौंद डाला है, तब उन्होंने बड़े क्रोधसे शत्रुको मार डालनेके लिये वज्रसे आक्रमण किया॥ २७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.27 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 960) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/11/27/