श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.11.21

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

हरीन्दशशतान्याजौ हर्यश्‍वस्य बलः शरैः।

तावद्भिरर्दयामास युगपल्लघुहस्तवान्॥ २१

harīndaśaśatānyājau haryaśvasya balaḥ śaraiḥ|

tāvadbhirardayāmāsa yugapallaghuhastavān|| 21

अर्थ

बलने बड़े हस्तलाघवसे एक साथ ही एक हजार बाण चलाकर इन्द्रके एक हजार घोड़ोंको घायल कर दिया॥ २१॥✎ 1978

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
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