श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.7

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

शङ्खतूर्यमृदङ्गानां भे१रीडमरिणां महान्।

हस्त्यश्‍वरथपत्तीनां नदतां निःस्वनोऽभवत्॥ ७

śaṅkhatūryamṛdaṅgānāṃ bherīḍamariṇāṃ mahān|

hastyaśvarathapattīnāṃ nadatāṃ niḥsvano'bhavat|| 7

अर्थ

उस समय लड़ाईमें शङ्ख, तुरही, मृदंग, नगारे और डमरू बड़े जोरसे बजने लगे; हाथियोंकी चिग्घाड़, घोड़ोंकी हिनहिनाहट, रथोंकी घरघराहट और पैदल सेनाकी चिल्लाहटसे बड़ा कोलाहल मच गया॥ ७॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—भेरीणां निःस्वनो।

    (मुद्रित पृष्ठ 952)

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें