परीक्षित्! अब इन्द्रकी फुर्तीसे घबराकर पहले तो बलि अन्तर्धान हो गये, फिर उन्होंने आसुरी मायाकी सृष्टि की। तुरंत ही देवताओंकी सेनाके ऊपर एक पर्वत प्रकट हुआ॥ ४५॥
ससर्जाथासुरीं मायामन्तर्धानगतोऽसुरः।
ततः प्रादुरभूच्छैलः सुरानीकोपरि प्रभो॥ ४५
परीक्षित्! अब इन्द्रकी फुर्तीसे घबराकर पहले तो बलि अन्तर्धान हो गये, फिर उन्होंने आसुरी मायाकी सृष्टि की। तुरंत ही देवताओंकी सेनाके ऊपर एक पर्वत प्रकट हुआ॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 955) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/45/