श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.43

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

तस्य कर्मोत्तमं वीक्ष्य दुर्मर्षः शक्तिमाददे।

तां ज्वलन्तीं महोल्काभां हस्तस्थामच्छिनद्धरिः॥ ४३

tasya karmottamaṃ vīkṣya durmarṣaḥ śaktimādade|

tāṃ jvalantīṃ maholkābhāṃ hastasthāmacchinaddhariḥ|| 43

अर्थ

इन्द्रकी यह प्रशंसनीय फुर्ती देखकर राजा बलि और भी चिढ़ गये। उन्होंने एक बहुत बड़ी शक्ति, जो बड़े भारी लूकेके समान जल रही थी, उठायी। किन्तु अभी वह उनके हाथमें ही थी—छूटने नहीं पायी थी कि इन्द्रने उसे भी काट डाला॥ ४३॥

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