श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.4

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

ततः सुरगणाः सर्वे सुधया पीतयैधिताः।

प्रतिसंयुयुधुः शस्त्रैर्नारायणपदाश्रयाः॥ ४

tataḥ suragaṇāḥ sarve sudhayā pītayaidhitāḥ|

pratisaṃyuyudhuḥ śastrairnārāyaṇapadāśrayāḥ|| 4

अर्थ

इधर देवताओंने एक तो अमृत पीकर विशेष शक्ति प्राप्त कर ली थी और दूसरे उन्हें भगवान्‌के चरणकमलोंका आश्रय था ही। बस, वे भी अपने अस्त्र-शस्त्रोंसे सुसज्जित हो दैत्योंसे भिड़ गये॥ ४॥✎ 723 724

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #723 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #724 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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