उसी श्रेष्ठ विमानपर राजा बलि सवार थे। सभी बड़े-बड़े सेनापति उनको चारों ओरसे घेरे हुए थे। उनपर श्रेष्ठ चमर डुलाये जा रहे थे और छत्र तना हुआ था। उस समय बलि ऐसे जान पड़ते थे, जैसे उदयाचलपर चन्द्रमा॥ १८॥✎ 20322033
आस्थितस्तद् विमानाग्र्यं सर्वानीकाधिपैर्वृतः।
वालव्यजनछत्राग्र्यै रेजे चन्द्र इवोदये॥ १८
उसी श्रेष्ठ विमानपर राजा बलि सवार थे। सभी बड़े-बड़े सेनापति उनको चारों ओरसे घेरे हुए थे। उनपर श्रेष्ठ चमर डुलाये जा रहे थे और छत्र तना हुआ था। उस समय बलि ऐसे जान पड़ते थे, जैसे उदयाचलपर चन्द्रमा॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 953) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)