श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.18

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

आस्थितस्तद् विमानाग्र्यं सर्वानीकाधिपैर्वृतः।

वालव्यजनछत्राग्र्यै रेजे चन्द्र इवोदये॥ १८

āsthitastad vimānāgryaṃ sarvānīkādhipairvṛtaḥ|

vālavyajanachatrāgryai reje candra ivodaye|| 18

अर्थ

उसी श्रेष्ठ विमानपर राजा बलि सवार थे। सभी बड़े-बड़े सेनापति उनको चारों ओरसे घेरे हुए थे। उनपर श्रेष्ठ चमर डुलाये जा रहे थे और छत्र तना हुआ था। उस समय बलि ऐसे जान पड़ते थे, जैसे उदयाचलपर चन्द्रमा॥ १८॥✎ 2032 2033

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #2032 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि
  • #2033 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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