श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.1.3

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

य४द्यस्मिन्‍नन्तरे ब्रह्मन्भगवान्विश्‍वभावनः।

कृतवान्कुरुते क५र्ता ह्यतीतेऽनागतेऽद्य वा॥ ३

yadyasminnantare brahmanbhagavānviśvabhāvanaḥ|

kṛtavānkurute kartā hyatīte'nāgate'dya vā|| 3

अर्थ

भगवन्! विश्‍वभावनभगवान् बीते हुए मन्वन्तरोंमें जो-जो लीलाएँ कर चुके हैं, वर्तमान मन्वन्तरमें जो कर रहे हैं और आगामी मन्वन्तरोंमें जो कुछ करेंगे, वह सब हमें सुनाइये॥ ३॥

टिप्पणियाँ

  1. ४

    प्रा० पा०—सर्वमन्वन्तरे।

    (मुद्रित पृष्ठ 905)
  2. ५

    प्रा० पा०—चान्यमतीते।

    (मुद्रित पृष्ठ 905)

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