श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.1.28

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

सत्यका हरयो वीरा देवास्त्रिशिख ईश्‍वरः।

ज्योतिर्धामादयः सप्त ऋषयस्तामसेऽन्तरे॥ २८

satyakā harayo vīrā devāstriśikha īśvaraḥ|

jyotirdhāmādayaḥ sapta ṛṣayastāmase'ntare|| 28

अर्थ

सत्यक, हरि और वीर नामक देवताओंके प्रधान गण थे। इन्द्रका नाम था त्रिशिख। उस मन्वन्तरमें ज्योतिर्धाम आदि सप्तर्षि थे॥ २८॥✎ 654

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #654 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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