वे आजीवन नैष्ठिक ब्रह्मचारी रहे। उन्हींके आचरणसे शिक्षा ग्रहण करके अठासी हजार व्रतनिष्ठ ऋषियोंने भी ब्रह्मचर्यव्रतका पालन किया॥ २२॥✎ 651
अष्टाशीतिसहस्राणि मुनयो ये धृतव्रताः।
अन्वशिक्षन्व्रतं तस्य कौमारब्रह्मचारिणः॥ २२
वे आजीवन नैष्ठिक ब्रह्मचारी रहे। उन्हींके आचरणसे शिक्षा ग्रहण करके अठासी हजार व्रतनिष्ठ ऋषियोंने भी ब्रह्मचर्यव्रतका पालन किया॥ २२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.1.22 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 908) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/1/22/