श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.1.18

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तांस्तथावसितान् वीक्ष्य यज्ञः सर्वगतो हरिः।

यामैः परिवृतो देवैर्हत्वाशासत् त्रिविष्टपम्॥ १८

tāṃstathāvasitān vīkṣya yajñaḥ sarvagato hariḥ|

yāmaiḥ parivṛto devairhatvāśāsat triviṣṭapam|| 18

अर्थ

यह देखकर अन्तर्यामी भगवान् यज्ञपुरुष अपने पुत्र याम नामक देवताओंके साथ वहाँ आये। उन्होंने उन खा डालनेके निश्‍चयसे आये हुए असुरोंका संहार कर डाला और फिर वे इन्द्रके पदपर प्रतिष्ठित होकर स्वर्गका शासन करने लगे॥ १८॥

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