परीक्षित्! भगवान्का दर्शन पाकर सभी देवता आनन्दसे विह्वल हो गये। उन लोगोंने धरतीपर लोटकर साष्टांग दण्डवत् किया और फिर धीरे-धीरे उठकर वे भगवान्की स्तुति करने लगे॥ ३०॥✎ 521522
दृष्ट्वा तमवनौ सर्व ईक्षणाह्लादविक्लवाः।
दण्डवत् पतिता राजञ्छनैरुत्थाय तुष्टुवुः॥ ३०
परीक्षित्! भगवान्का दर्शन पाकर सभी देवता आनन्दसे विह्वल हो गये। उन लोगोंने धरतीपर लोटकर साष्टांग दण्डवत् किया और फिर धीरे-धीरे उठकर वे भगवान्की स्तुति करने लगे॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.9.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 747) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/9/30/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)