श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.9.30

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

दृष्ट्वा तमवनौ सर्व ईक्षणाह्लादविक्लवाः।

दण्डवत् पतिता राजञ्छनैरुत्थाय तुष्टुवुः॥ ३०

dṛṣṭvā tamavanau sarva īkṣaṇāhlādaviklavāḥ|

daṇḍavat patitā rājañchanairutthāya tuṣṭuvuḥ|| 30

अर्थ

परीक्षित्! भगवान्का दर्शन पाकर सभी देवता आनन्दसे विह्वल हो गये। उन लोगोंने धरतीपर लोटकर साष्टांग दण्डवत् किया और फिर धीरे-धीरे उठकर वे भगवान्‌की स्तुति करने लगे॥ ३०॥✎ 521 522

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #521 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #522 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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