साथ ही वे छिप-छिपकर असुरोंको भी आहुति दिया करते थे। उनकी माता असुरकुलकी थीं, इसीलिये वे मातृस्नेहके वशीभूत होकर यज्ञ करते समय उस प्रकार असुरोंको भाग पहुँचाया करते थे॥ ३॥
स एव हि ददौ भागं परोक्षमसुरान् प्रति।
यजमानोऽवहद् भागं मातृस्नेहवशानुगः॥ ३
साथ ही वे छिप-छिपकर असुरोंको भी आहुति दिया करते थे। उनकी माता असुरकुलकी थीं, इसीलिये वे मातृस्नेहके वशीभूत होकर यज्ञ करते समय उस प्रकार असुरोंको भाग पहुँचाया करते थे॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.9.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 744) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/9/3/