चमकते हुए तीन नोकोंवाले त्रिशूलको लेकर जब वह नाचने, चिल्लाने और कूदने लगता था, उस समय पृथ्वी काँप उठती थी और ऐसा जान पड़ता था कि उस त्रिशूलपर उसने अन्तरिक्षको उठा रखा है॥ १५॥
देदीप्यमाने त्रिशिखे शूल आरोप्य रोदसी।
नृत्यन्तमुन्नदन्तं च चालयन्तं पदा महीम्॥ १५
चमकते हुए तीन नोकोंवाले त्रिशूलको लेकर जब वह नाचने, चिल्लाने और कूदने लगता था, उस समय पृथ्वी काँप उठती थी और ऐसा जान पड़ता था कि उस त्रिशूलपर उसने अन्तरिक्षको उठा रखा है॥ १५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.9.15 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 745) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/9/15/