श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.8.26

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

त्वं तिग्मधारासिवरारिसैन्य-

मीशप्रयुक्तो मम छिन्धि छिन्धि।

चक्षूंषि चर्मञ्छतचन्द्र छादय

द्विषामघोनां हर पापचक्षुषाम्॥ २६

tvaṃ tigmadhārāsivarārisainya-

mīśaprayukto mama chindhi chindhi|

cakṣūṃṣi carmañchatacandra chādaya

dviṣāmaghonāṃ hara pāpacakṣuṣām|| 26

अर्थ

भगवान्‌की प्यारी तलवार! आपकी धार बहुत तीक्ष्ण है। आप भगवान्‌की प्रेरणासे मेरे शत्रुओंको छिन्‍न-भिन्‍न कर दीजिये। भगवान्‌की प्यारी ढाल! आपमें सैकड़ों चन्द्राकार मण्डल हैं। आप पाप-दृष्टि पापात्मा शत्रुओंकी आँखें बंद कर दीजिये और उन्हें सदाके लिये अंधा बना दीजिये॥ २६॥✎ 515 516 517

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #515 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #516 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #517 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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