श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.8.18

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

धन्वन्तरिर्भगवान् पात्वपथ्याद्

द्वन्द्वाद् भयादृषभो निर्जितात्मा।

यज्ञश्‍च लोकादवताज्जनान्ताद्

बलो गणात् क्रोधवशादहीन्द्रः॥ १८

dhanvantarirbhagavān pātvapathyād

dvandvād bhayādṛṣabho nirjitātmā|

yajñaśca lokādavatājjanāntād

balo gaṇāt krodhavaśādahīndraḥ|| 18

अर्थ

भगवान् धन्वन्तरि कुपथ्यसे, जितेन्द्रिय भगवान् ऋषभदेव सुख-दुःख आदि भयदायक द्वन्द्वोंसे, यज्ञभगवान् लोकापवादसे, बलरामजी मनुष्यकृत कष्टोंसे और श्रीशेषजी क्रोधवश नामक सर्पोंके गणसे मेरी रक्षा करें॥ १८॥

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