श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.8.16

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

मामुग्रधर्मादखिलात् प्रमादा-

न्‍नारायणः पातु नरश्‍च हासात्।

दत्तस्त्वयोगादथ योगनाथः

पायाद् गुणेशः कपिलः कर्मबन्धात्॥ १६

māmugradharmādakhilāt pramādā-

nnārāyaṇaḥ pātu naraśca hāsāt|

dattastvayogādatha yoganāthaḥ

pāyād guṇeśaḥ kapilaḥ karmabandhāt|| 16

अर्थ

भगवान् नारायण मारण-मोहन आदि भयंकर अभिचारों और सब प्रकारके प्रमादोंसे मेरी रक्षा करें। ऋषिश्रेष्ठ नर गर्वसे, योगेश्‍वर भगवान् दत्तात्रेय योगके विघ्नोंसे और त्रिगुणाधिपति भगवान् कपिल कर्मबन्धनोंसे मेरी रक्षा करें॥ १६॥

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