॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.8.11
आत्मानं परमं ध्यायेद् ध्येयं षट्शक्तिभिर्युतम्।
विद्यातेजस्तपोमूर्तिमिमं मन्त्रमुदाहरेत्॥ ११
ātmānaṃ paramaṃ dhyāyed dhyeyaṃ ṣaṭśaktibhiryutam|
vidyātejastapomūrtimimaṃ mantramudāharet|| 11
अर्थ
इसके बाद समग्र ऐश्वर्य, धर्म, यश, लक्ष्मी ज्ञान और वैराग्यसे परिपूर्ण इष्टदेव भगवान्का ध्यान करे और अपनेको भी तद्रूप ही चिन्तन करे। तत्पश्चात् विद्या, तेज और तपःस्वरूप इस कवचका पाठ करे—॥ ११॥