श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.7.9

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

ततो निर्गत्य सहसा कविराङ्गिरसः प्रभुः।

आययौ स्वगृहं तूष्णीं विद्वान् श्रीमदविक्रियाम्॥ ९

tato nirgatya sahasā kavirāṅgirasaḥ prabhuḥ|

āyayau svagṛhaṃ tūṣṇīṃ vidvān śrīmadavikriyām|| 9

अर्थ

त्रिकालदर्शी समर्थ बृहस्पतिजीने देखा कि यह ऐश्‍वर्यमदका दोष है! बस, वे झटपट वहाँसे निकलकर चुपचाप अपने घर चले आये॥ ९॥

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