॥ श्रीहरिः ॥
ततो निर्गत्य सहसा कविराङ्गिरसः प्रभुः।
आययौ स्वगृहं तूष्णीं विद्वान् श्रीमदविक्रियाम्॥ ९
tato nirgatya sahasā kavirāṅgirasaḥ prabhuḥ|
āyayau svagṛhaṃ tūṣṇīṃ vidvān śrīmadavikriyām|| 9
अर्थ
त्रिकालदर्शी समर्थ बृहस्पतिजीने देखा कि यह ऐश्वर्यमदका दोष है! बस, वे झटपट वहाँसे निकलकर चुपचाप अपने घर चले आये॥ ९॥
ततो निर्गत्य सहसा कविराङ्गिरसः प्रभुः।
आययौ स्वगृहं तूष्णीं विद्वान् श्रीमदविक्रियाम्॥ ९
त्रिकालदर्शी समर्थ बृहस्पतिजीने देखा कि यह ऐश्वर्यमदका दोष है! बस, वे झटपट वहाँसे निकलकर चुपचाप अपने घर चले आये॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.7.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 734) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/7/9/