श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.7.13

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 7 · अथ सप्तमोऽध्यायः

ये पारमेष्ठ्यं धिषणमधितिष्ठन् न कञ्चन।

प्रत्युत्तिष्ठेदिति ब्रूयुर्धर्मं ते न परं विदुः॥ १३

ye pārameṣṭhyaṃ dhiṣaṇamadhitiṣṭhan na kañcana|

pratyuttiṣṭhediti brūyurdharmaṃ te na paraṃ viduḥ|| 13

अर्थ

जो लोग यह कहते हैं कि सार्वभौम राजसिंहासनपर बैठा हुआ सम्राट् किसीके आनेपर राजसिंहासनसे न उठे, वे धर्मका वास्तविक स्वरूप नहीं जानते॥ १३॥

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