श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.6.32

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

स्वर्भानोः सुप्रभां कन्यामुवाह नमुचिः किल।

वृषपर्वणस्तु शर्मिष्ठां ययातिर्नाहुषो बली॥ ३२

svarbhānoḥ suprabhāṃ kanyāmuvāha namuciḥ kila|

vṛṣaparvaṇastu śarmiṣṭhāṃ yayātirnāhuṣo balī|| 32

अर्थ

स्वर्भानुकी कन्या सुप्रभासे नमुचिने और वृषपर्वाकी पुत्री शर्मिष्ठासे महाबली नहुषनन्दन ययातिने विवाह किया॥ ३२॥

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