॥ श्रीहरिः ॥
स्वर्भानोः सुप्रभां कन्यामुवाह नमुचिः किल।
वृषपर्वणस्तु शर्मिष्ठां ययातिर्नाहुषो बली॥ ३२
svarbhānoḥ suprabhāṃ kanyāmuvāha namuciḥ kila|
vṛṣaparvaṇastu śarmiṣṭhāṃ yayātirnāhuṣo balī|| 32
अर्थ
स्वर्भानुकी कन्या सुप्रभासे नमुचिने और वृषपर्वाकी पुत्री शर्मिष्ठासे महाबली नहुषनन्दन ययातिने विवाह किया॥ ३२॥
स्वर्भानोः सुप्रभां कन्यामुवाह नमुचिः किल।
वृषपर्वणस्तु शर्मिष्ठां ययातिर्नाहुषो बली॥ ३२
स्वर्भानुकी कन्या सुप्रभासे नमुचिने और वृषपर्वाकी पुत्री शर्मिष्ठासे महाबली नहुषनन्दन ययातिने विवाह किया॥ ३२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.6.32 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 732) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/6/32/