श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.4.49

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

स वै यदा महादेवो मम वीर्योपबृंहितः।

मेने खिलमिवात्मानमुद्यतः सर्गकर्मणि॥ ४९

sa vai yadā mahādevo mama vīryopabṛṃhitaḥ|

mene khilamivātmānamudyataḥ sargakarmaṇi|| 49

अर्थ

जब मैंने उनमें शक्ति और चेतनाका संचार किया तब देवशिरोमणि ब्रह्मा सृष्टि करनेके लिये उद्यत हुए। परन्तु उन्होंने अपनेको सृष्टिकार्यमें असमर्थ-सा पाया॥ ४९॥✎ 512

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #512 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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