सूतजी कहते हैं—शौनकादि ऋषियो! परम योगी व्यासनन्दन श्रीशुकदेवजीने राजर्षि परीक्षित्का यह सुन्दर प्रश्न सुनकर उनका अभिनन्दन किया और इस प्रकार कहा॥ ३॥
इति सम्प्रश्नमाकर्ण्य राजर्षेर्बादरायणिः।
प्रतिनन्द्य महायोगी जगाद मुनिसत्तमाः॥ ३
सूतजी कहते हैं—शौनकादि ऋषियो! परम योगी व्यासनन्दन श्रीशुकदेवजीने राजर्षि परीक्षित्का यह सुन्दर प्रश्न सुनकर उनका अभिनन्दन किया और इस प्रकार कहा॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.4.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 717) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/4/3/