prajāsargāya hi kathaṃ vṛkṣān nirdagdhumarhatha|| 10
अर्थ
निष्पाप प्रचेताओ! आपके पिता और देवाधिदेव भगवान्ने आपलोगोंको यह आदेश दिया है कि प्रजाकी सृष्टि करो। ऐसी स्थितिमें आप वृक्षोंको जला डालें, यह कैसे उचित हो सकता है॥ १०॥✎ 507508
यूयं च पित्रान्वादिष्टा देवदेवेन चानघाः।
प्रजासर्गाय हि कथं वृक्षान् निर्दग्धुमर्हथ॥ १०
निष्पाप प्रचेताओ! आपके पिता और देवाधिदेव भगवान्ने आपलोगोंको यह आदेश दिया है कि प्रजाकी सृष्टि करो। ऐसी स्थितिमें आप वृक्षोंको जला डालें, यह कैसे उचित हो सकता है॥ १०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.4.10 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 718) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/4/10/