श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.3.5

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

यदि स्युर्बहवो लोके शास्तारो दण्डधारिणः।

कस्य स्यातां न वा कस्य मृत्युश्चामृतमेव वा॥ ५

yadi syurbahavo loke śāstāro daṇḍadhāriṇaḥ|

kasya syātāṃ na vā kasya mṛtyuścāmṛtameva vā|| 5

अर्थ

यदि संसारमें दण्ड देनेवाले बहुत-से शासक हों, तो किसे सुख मिले और किसे दुःख—इसकी व्यवस्था एक-सी न हो सकेगी॥ ५॥

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