जिस समय इसने ‘नारायण’ इन चार अक्षरोंका उच्चारण किया, उसी समय केवल उतनेसे ही इस पापीके समस्त पापोंका प्रायश्चित्त हो गया॥ ८॥✎ 496
एतेनैव ह्यघोनोऽस्य कृतं स्यादघनिष्कृतम्।
यदा नारायणायेति जगाद चतुरक्षरम्॥ ८
जिस समय इसने ‘नारायण’ इन चार अक्षरोंका उच्चारण किया, उसी समय केवल उतनेसे ही इस पापीके समस्त पापोंका प्रायश्चित्त हो गया॥ ८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.8 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 704) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/2/8/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)