श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.13

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अथैनं मापनयत कृताशेषाघनिष्कृतम्।

यदसौ भगवन्‍नाम म्रियमाणः समग्रहीत्॥ १३

athainaṃ māpanayata kṛtāśeṣāghaniṣkṛtam|

yadasau bhagavannāma mriyamāṇaḥ samagrahīt|| 13

अर्थ

इसलिये यमदूतो! तुमलोग अजामिलको मत ले जाओ। इसने सारे पापोंका प्रायश्चित्त कर लिया है, क्योंकि इसने मरते समय* भगवान्‌के नामका उच्चारण किया है॥ १३॥

टिप्पणियाँ

  1. *

    पापकी निवृत्तिके लिये भगवन्‍नामका एक अंश ही पर्याप्त है, जैसे ‘राम’ का ‘रा’। इसने तो सम्पूर्ण नामका उच्चारण कर लिया। मरते समयका अर्थ ठीक मरनेका क्षण ही नहीं है, क्योंकि मरनेके क्षण जैसे कृच्छ्र-चान्द्रायण आदि करनेके लिये विधि नहीं हो सकती, वैसे नामोच्चारण भी नहीं है। इसलिये ‘म्रियमाण’ शब्दका यह अभिप्राय है कि अब आगे इससे कोई पाप होनेकी सम्भावना नहीं है।

    (मुद्रित पृष्ठ 705)

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