राजन्! यह मरुद्गणका जन्म बड़ा ही मंगलमय है। इसके विषयमें तुमने मुझसे जो प्रश्न किया था, उसका उत्तर समग्ररूपसे मैंने तुम्हें दे दिया। अब तुम और क्या सुनना चाहते हो?॥ ७८॥
एवं ते सर्वमाख्यातं यन्मां त्वं परिपृच्छसि।
मङ्गलं मरुतां जन्म किं भूयः कथयामि ते॥ ७८
राजन्! यह मरुद्गणका जन्म बड़ा ही मंगलमय है। इसके विषयमें तुमने मुझसे जो प्रश्न किया था, उसका उत्तर समग्ररूपसे मैंने तुम्हें दे दिया। अब तुम और क्या सुनना चाहते हो?॥ ७८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.78 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 800) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/18/78/