श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.7

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

पौलोम्यामिन्द्र आधत्त त्रीन् पुत्रानिति नः श्रुतम्।

जयन्तमृषभं तात तृतीयं मीढुषं प्रभुः॥ ७

paulomyāmindra ādhatta trīn putrāniti naḥ śrutam|

jayantamṛṣabhaṃ tāta tṛtīyaṃ mīḍhuṣaṃ prabhuḥ|| 7

अर्थ

प्रिय परीक्षित्! देवराज इन्द्रकी पत्‍नी थीं पुलोमनन्दिनी शची। उनसे हमने सुना है, उन्होंने तीन पुत्र उत्पन्‍न किये—जयन्त, ऋषभ और मीढ्वान्॥ ७॥

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