उसने इन्द्रको सम्बोधन करके कहा—‘बेटा! मैं इस इच्छासे इस अत्यन्त कठिन व्रतका पालन कर रही थी कि तुम अदितिके पुत्रोंको भयभीत करनेवाला पुत्र उत्पन्न हो॥ ६९॥✎ 553
अथेन्द्रमाह ताताहमादित्यानां भयावहम्।
अपत्यमिच्छन्त्यचरं व्रतमेतत्सुदुष्करम्॥ ६९
उसने इन्द्रको सम्बोधन करके कहा—‘बेटा! मैं इस इच्छासे इस अत्यन्त कठिन व्रतका पालन कर रही थी कि तुम अदितिके पुत्रोंको भयभीत करनेवाला पुत्र उत्पन्न हो॥ ६९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.69 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 799) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/18/69/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)