श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.17

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

बाणज्येष्ठं पुत्रशतमशनायां ततोऽभवत्।

तस्यानुभावः सुश्लोक्यः पश्चादेवाभिधास्यते॥ १७

bāṇajyeṣṭhaṃ putraśatamaśanāyāṃ tato'bhavat|

tasyānubhāvaḥ suślokyaḥ paścādevābhidhāsyate|| 17

अर्थ

बलिकी पत्नीका नाम अशना था। उससे बाण आदि सौ पुत्र हुए। दैत्यराज बलिकी महिमा गान करनेयोग्य है। उसे मैं आगे (आठवें स्कन्धमें) सुनाऊँगा॥ १७॥

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