श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.17.40

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

इतिहासमिमं पुण्यं चित्रकेतोर्महात्मनः।

माहात्म्यं विष्णुभक्तानां श्रुत्वा बन्धाद्विमुच्यते॥ ४०

itihāsamimaṃ puṇyaṃ citraketormahātmanaḥ|

māhātmyaṃ viṣṇubhaktānāṃ śrutvā bandhādvimucyate|| 40

अर्थ

महात्मा चित्रकेतुका यह पवित्र इतिहास केवल उनका ही नहीं, समस्त विष्णुभक्तोंका माहात्म्य है; इसे जो सुनता है, वह समस्त बन्धनोंसे मुक्त हो जाता है॥ ४०॥✎ 549

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #549 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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