जो लोग भगवान्के शरणागत होते हैं, वे किसीसे भी नहीं डरते। क्योंकि उन्हें स्वर्ग, मोक्ष और नरकोंमें भी एक ही वस्तुके—केवल भगवान्के ही समानभावसे दर्शन होते हैं॥ २८॥✎ 546547548
नारायणपराः सर्वे न कुतश्चन बिभ्यति।
स्वर्गापवर्गनरकेष्वपि तुल्यार्थदर्शिनः॥ २८
जो लोग भगवान्के शरणागत होते हैं, वे किसीसे भी नहीं डरते। क्योंकि उन्हें स्वर्ग, मोक्ष और नरकोंमें भी एक ही वस्तुके—केवल भगवान्के ही समानभावसे दर्शन होते हैं॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.17.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 790) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/17/28/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)