श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.16.17

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

अथ तस्मै प्रपन्‍नाय भक्ताय प्रयतात्मने।

भगवान्‍नारदः प्रीतो विद्यामेतामुवाच ह॥ १७

atha tasmai prapannāya bhaktāya prayatātmane|

bhagavānnāradaḥ prīto vidyāmetāmuvāca ha|| 17

अर्थ

भगवान् नारदने देखा कि चित्रकेतु जितेन्द्रिय, भगवद्भक्त और शरणागत हैं। अतः उन्होंने बहुत प्रसन्‍न होकर उन्हें इस विद्याका उपदेश किया॥ १७॥

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