राजन्! हम, तुम और हमलोगोंके साथ इस जगत्में जितने भी चराचर प्राणी वर्तमान हैं—वे सब अपने जन्मके पहले नहीं थे और मृत्युके पश्चात् नहीं रहेंगे। इससे सिद्ध है कि इस समय भी उनका अस्तित्व नहीं है। क्योंकि सत्य वस्तु तो सब समय एक-सी रहती है॥ ५॥✎ 541
वयं च त्वं च ये चेमे तुल्यकालाश्चराचराः।
जन्ममृत्योर्यथा पश्चात् प्राङ्नैवमधुनापि भोः॥ ५
राजन्! हम, तुम और हमलोगोंके साथ इस जगत्में जितने भी चराचर प्राणी वर्तमान हैं—वे सब अपने जन्मके पहले नहीं थे और मृत्युके पश्चात् नहीं रहेंगे। इससे सिद्ध है कि इस समय भी उनका अस्तित्व नहीं है। क्योंकि सत्य वस्तु तो सब समय एक-सी रहती है॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.15.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 775) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/15/5/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)